
वॉशिंगटन. अरुण जेटली ने कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे सुधारों को लागू करने के लिए पूरी दुनिया भारत की हिम्मत की दाद दे रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे बता देंगे कि लोग किसको सपोर्ट करते हैं। लोगों का भारत में भरोसा जगा है...न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में जेटली ने कहा कि जीएसटी और नोटबंदी जैसे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स पर दुनिया में एक्सपर्ट्स ने अपनी राय दी है। इसमें भारत की इमेज एक भरोसेमंद देश की बनी है। जेटली अमेरिका में वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) की मीटिंग में हिस्सा लेने आए हैं। "बीते 3 सालों को देखें तो कई देशों की इकोनॉमी में गिरावट आई है। इससे तुलना करें तो भारत बेहतर स्थिति में था। इसका फायदा उठाते हुए नोटबंदी, जीएसटी जैसे सुधार किए। इसके लिए काफी हिम्मत की जरूरत थी। यहां दुनियाभर से आए लीडर्स और एक्सपर्ट्स सुधारों को लेकर भारत के हौसले की तारीफ कर रहे हैं।"
जेटली ने कहा कि हमने रिफॉर्म्स किए लेकिन कांग्रेस आलोचना कर रही है। सही बात तो ये है कि कोई भी कांग्रेस की बात पर ध्यान ही नहीं दे रहा। "दरअसल नोटबंदी ने एक तरह से ब्लैक मनी से चलने वाली शैडो इकोनॉमी पर चोट की। ब्लैक मनी को हटाना कभी भी कांग्रेस की प्राथमिकता में नहीं रहा। इसी को लेकर आज वे तनाव में हैं।"
"जीएसटी पर कांग्रेस अपना रुख बदल रही है। कांग्रेस शासित सभी राज्य जीएसटी लाने की बात कहते रहे लेकिन कांग्रेस इस एकसमान टैक्स का विरोध करती रही।" IMF ने इकोनॉमी ग्रोथ के लिए दिए थे 3 सुझाव IMF के एशिया-पैसिफिक डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर केनेथ कांग कहा, "पहली प्रायोरिटी है कि भारत कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाया जाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि नॉन परफॉर्मिंग लोन को हल किया जाए और डेट रिकवरी मैकेनिज्म (कर्ज वसूलने के उपाय) को दुरुस्त किया जाए।" कांग के मुताबिक, "दूसरी प्रायोरिटी ये है कि भारत को रेवेन्यू में सुधार कर वित्तीय कोष को बढ़ाना चाहिए। साथ ही भारत को सब्सिडी में भी कटौती करनी होगी।" "तीसरी बात है कि भारत को इन्फ्रास्ट्रक्चर गैप पाटते हुए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स करना चाहिए। ये भी जरूरी है कि भारत में कृषि क्षेत्र में सुधार हो और मजदूरों की कुशलता बढ़े। लेबर कानूनों को कम करना जरूरी है। फिलहाल भारत में देश और राज्य के लेवल पर 250 लेबर कानून हैं।"