अनवर चौहान

पूर्व उप-राष्ट्रपति पद  हामिद अंसारी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि देश  के मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना दिखाई पड़ती है. हामिद अंसारी का ये बयान ऐसे वक्त आया जब वो अपना कार्यकाल पूरा कर चुके थे। मुसलमानों के वो अगर इतने ही हितैशी थे तो उन को बहुत पहले ही अपना त्याग-पत्र दे कर इस मुद्दे को सड़क पर उठाना चाहिए था। उसमें ज़्यादा वज़न होता। लेकिन कोई बात नहीं देर आए पर दुरूस्त आए। इसके अलावा उन्होंने राज्यसभा में अपने विदाई भाषण में कहा था, "मैं आज पूर्व राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन के वही शब्द दोहराना चाहता हूँ जो मैंने 2012 में कहे थे. एक लोकतंत्र की पहचान इस बात से होती है कि वो अपने अल्पसंख्यकों को कितनी सुरक्षा दे सकता है." हामिद अंसारी ने कोई ग़लत बात नहीं कही. उन्होंने जो कुछ कहा है वो सौ फीसदी सही कहा है. यह हक़ीक़त बयानी और सच्चाई है. अरबी में कहा जाता है, "अल हक़्क़ू मुर्रुन सच" यानी सच कड़वा होता है.

सच हमेशा से कड़वा होता है और कड़वाहट बहुत से लोगों को हज़म नहीं होती है. लेकिन जो कुछ उन्होंने कहा है उसमें कोई शक-ओ-शुबा नहीं किया जा सकता है. `महिलाओं-दलितों-अल्पसंख्यकों पर हमले रोके भारत` मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना है. यह पहले भी होती थी लेकिन पिछले तीन सालों में असुरक्षा की यह भावना दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है. इससे इनकार करना हक़ीक़त को झुठलाना है.मुस्लिमों की ग़रीबी, अशिक्षा और नौकरी के मुद्दे पर पिछली सरकारें कुछ गंभीर दिखती रही हैं. पिछली सरकार ने रंगनाथ  मिश्रा आयोग बनाया था जिसमें मैं भी था. आयोग ने सभी अल्पसंख्यकों ख़ासकर मुस्लिमों के विकास के लिए बहुत-सी सिफारिशें की थीं और वह रिपोर्ट 2007 में आ गई थी.


इस रिपोर्ट के आने के बाद 2014 तक यूपीए सरकार सत्ता में रही लेकिन उसने कुछ नहीं किया. इससे पहले सच्चर कमिटी ने मुस्लिमों के हालातों को लेकर एक साफ़ तस्वीर लाकर रख दी थी कि वह कितने पिछड़े हैं. उस पर कौन-सा एक्शन लिया गया? लेकिन ऐसी असुरक्षा की भावना पहले नहीं थी जितनी अब है. हमारे संविधान में लिखा है कि हम धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हैं, लेकिन हमारा समाज कभी धर्मनिरपेक्ष नहीं रहा. हमारे समाज में धर्म लोगों पर इतना हावी रहा है कि आज़ादी के 70 साल के बाद भी लोगों के अंदर धर्मनिरपेक्षता नहीं आ पाई है. हर समाज में कुछ तबके ऐसे हैं जो असहिष्णु हैं. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन रहते समय मैंने तीन प्रधानमंत्रियों का सामना किया था. मेरी नियुक्ति के समय एचडी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, उसके बाद आईके गुजराल और फिर अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने. वाजपेयी की सरकार से पहले सहिष्णुता थी ऐसा नहीं है लेकिन वाजपेयी की सरकार के बाद जो कुछ होता रहा वह सभी  को पता है. 2014 में बीजेपी की सरकार सत्ता में आने के बाद उसे किसी का डर नहीं है और मुस्लिमों के पक्ष में दो-चार बयान देने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता.


हामिद अंसारी के बयान के तुरंत बाद ही उसकी आलोचना की जाने लगी. उनकी जगह आने वाले वेंकैया नायडू ने तुरंत बयान दे दिया. वेंकैया के बयान से लगता है कि वह कहना चाहते हैं कि हामिद का बयान झूठा है. संविधान द्वारा अल्पसंख्यकों को अधिकार मिले हैं. धर्म और भाषा के आधार पर अल्पसंख्यकों को अधिकार दिए गए हैं. लेकिन उसके आधार पर सुरक्षा नहीं दी गई है. पिछली सरकारों की विचारधाराएं अलग थीं और इस हालिया सरकार की अलग है. पिछली सरकारें चाहती थीं कि इस तबके को कैसे खुश रखा जाए.