भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसराइल की आवभगत से अभिभूत हैं. इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मोदी के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी.नेतन्याहू ने मोदी को अपना दोस्त कहा और मोदी ने भी उन्हें दोस्त माना. पर क्या दोनों दोस्त प्रधानमंत्रियों में कोई तुलना की जा सकती है? बिन्यामिन नेतन्याहू ने इसराइल में चौथी बार सत्ता संभाली है. वह इसराइली सत्ता पर लंबे समय तक काबिज रहने वाले नेता बन गए हैं. इस चतुर राजनेता ने 2014 के आख़िर में अचानक से चुनाव की घोषणा कर दी थी. ओपिनियन पोल में ख़राब स्थिति के बावजूद वह नाटकीय रूप से चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. नेतन्याहू के चुनावी मुद्दों में इसराइल की सुरक्षा सबसे पहले रहती है. ऐसे में फ़लस्तीनियों के प्रति उनका सख्त रवैया रहा है. नेतन्याहू का मिलिटरी रिकॉर्ड  बिन्यामिन ``बिबी`` नेतन्याहू का जन्म तेल अवीव में 1949 में हुआ था. 1963 में जब इनके इतिहासकार और यहूदी एक्टिविस्ट पिता बेंज़िऑन को अमरीका में एक एकैडमिक पोस्ट का प्रस्ताव मिला तो पूरा परिवार अमरीका चला गया.

18 साल की उम्र में नेतन्याहू इसराइल लौट आए. यहां वह पांच साल आर्मी में रहे. वह एक अहम कमांडो यूनिट में कैप्टन रहे. नेतन्याहू 1968 में बेरूत एयरपोर्ट पर हुए एक ऑपरेशन में शामिल थे. इसके साथ ही 1973 में मध्य-पूर्व का युद्ध भी उन्होंने लड़ा. आर्मी सर्विस ख़त्म होने के बाद नेतन्याहू फिर से अमरीका आ गए. यहां उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से बैचलर और मास्टर की पढ़ाई की.

1976 में नेतन्याहू के भाई जोनाथन युगांडा के एंतेबे में अगवा कर बंधक बनाए गए एक विमान को छुड़ाने के लिए अभियान में शामिल हुए थे. इस अभियान में जोनाथन को जान गंवानी पड़ी थी. इस मौत का असर नेतन्याहू के परिवार पर गहरा पड़ा. उनके भाई का नाम इसराइल की महान हस्तियों में शामिल हो गया. नेतन्याहू ने अपने भाई की याद में एक आतंकवाद विरोधी इंस्टिट्यूट की स्थापना की.
इस वजह से अमरीका में इसराइल के राजदूत और भविष्य के विदेश मंत्री मोशे एरेन्स का ध्यान खींचा था. 1982 में एरेन्स ने बिन्यामिन नेतन्याहू को वॉशिंगटन में अपना डेप्युटी चीफ़ ऑफ मिशन नियुक्त किया. रातो-रात नेतन्याहू के सार्वजनिक जीवन को पंख मिल गए. नेतन्याहू अमरीकी अंदाज़ में बिल्कुल खरी इंग्लिश बोलते हैं.

वह जल्द ही अमरीकी टेलीविजन पर जाना-पहचाना चेहरा बन गए. वह पश्चिम में इसराइल की बात बड़ी मुखरता से रखने लगे थे. आगे चलकर नेतन्याहू को 1984 में न्यूयॉर्क में यूएन में इसराइल का स्थायी प्रतिनिधि बना दिया गया. 1998 में जब वह इसराइल वापस आए तो देश की राजनीति में दस्तक दी. उन्होंने संसदीय चुनाव जीता और उप विदेश मंत्री बने. राजनीतिक रूप से बिन्यामिन नेतन्याहू ख़ुद को दक्षिणपंथी बताते हैं.

1992 के आम चुनाव में लिकुड पार्टी की जब हार हुई तो उन्हें पार्टी का चेयरमैन बनाया गया. 1996 में इसराइल के राष्ट्रपति शिमोन पेरेज ने प्रधानमंत्री यित्ज़ाक रॉबिन की हत्या के बाद वक़्त से पहले चुनाव की घोषणा की थी. इस चुनाव में नेतन्याहू को सीधी जीत मिली और वह इसराइल के प्रधामंत्री बने. नेतन्याहू इसराइल के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने और वह इस मामले में भी एकलौते हैं कि उनका जन्म 1948 में इसराइल के जन्म बाद हुआ था. नेतन्याहू का पहला कार्यकाल छोटा रहा लेकिन काफ़ी नाटकीय था. इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच ओस्लो एकॉर्ड्स समझौते की तीखी आलोचना के बावजूद 1997 में नेतन्याहू ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया जिसमें हेब्रोन का 80 फ़ीसदी नियंत्रण फ़लस्तीनियों को देना था. इसके साथ ही उन्होंने 1998 में वाई रिवर मेमोरेंडम पर भी हस्ताक्षर किया जिससे पश्चिमी बैंक से अधिक निकासी का रास्ता साफ़ हुआ.